

# Event Details

- **Event Name**: आज के समय
- **Event Start and End Date**: Wed, 04 Nov, 2026 at 12:00 am (+05:30)
- **Event Description**: अमेरिका और ईरान युद्ध; कौन साँप ,कौन छछूंदर?

भारतीय संस्कृति में महिलाओं और पुरुषों के श्रृंगार को महत्व नहीं दिया गया है यहाँ भाषाएँ भी अपने स्थानीय भाव ,भाषा भूषा, परंपराओं और सामाजिक ढांचे के अनुरूप श्रृंगार करती है। जिसमें कम शब्दों में बड़ी बात का अर्थ निहित होता है । इसे हम लोकोक्तियाँ, कहावतें या मुहावरें कहते हैं।
   विश्व की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए एक कहावत अनायास ही  मुख से निकली - "साँप के मुंह में छछूंदर" । कभी कभी बलवान बलिष्ठ व्यक्ति भी अपने बल के मद में चूर ऐसे कार्य कर बैठता है जिसके परिणाम उसे धर्म संकट में डाल देते हैं। धर्म संकट ऐसा कि कार्य को पूरा करने पर घोर हानि जो धन,जन के साथ साथ जय पराजय के रुप में भी हो सकती है और यदि कार्य बीच में ही अधूरा छोड़ते हैं तो मान सम्मान की हानि ।ऐसी स्थिति अत्याधिक महत्वाकांक्षा और लालच की प्रवृत्ति के कारण आती है। संत कबीरदास जी ने ठीक ही कहा है -
"माखी गुड़ में गड़ी रहे,
पंख रहे लिपटाय।
हाथ मलते और सिर धुने,
लालच बुरी बलाय।।"
        अमेरिका और ईरान के मध्य युद्ध की जो स्थिति बन रही है उसे देखकर “साँप और छछूंदर” की लोकप्रचलित कहावत सिद्ध होती दिख रही है, जिसका अर्थ होता है न निगलते बने, न उगलते बने। आज के वैश्विक परिदृश्य में यदि अमेरिका की स्थिति को इस रूपक से समझें, तो दिखता है कि वर्तमान समय में अमेरिका एक ऐसे द्वंद्व में फँसा हुआ दिखता है जहाँ उसके सामने अनेक जटिल चुनौतियाँ एक साथ खड़ी हैं। एक ओर वह विश्व नेतृत्व की अपनी पुरानी भूमिका को बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक दबाव, आंतरिक राजनीतिक विभाजन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती शक्तियों जैसे भारत , रुस और चीन की बढ़ती चुनौती उसे लगातार असहज कर रही है। वह किसी भी विषय पर पूरी तरह यदि पीछे हटता है तो उसकी वैश्विक साख को क्षति पहुँच रही है और युद्ध में आगे बढ़कर आक्रामक नीति अपनाता है तो उसे आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक दुष्परिणामों का सामना करना पड़ रहा  है। अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में उसकी भूमिका ऐसी हो गई है कि वह न तो पूर्ण हस्तक्षेप से बच पा रहा है और न ही निर्णायक समाधान दे पा रहा है। इससे उसकी स्थिति ठीक वैसी हो गई है जैसे "साँप के मुँह में छछूंदर"..... जिसे न निगल सकता है ( मान हानि होने का भय है) और न उगल सकता है ( वैश्विक नेतृत्व हाथ से जाता दिख रहा है) अर्थात्  यदि वह पीछे हटता है तो उसकी वैश्विक छवि कमजोर होती है और यदि आगे बढ़ता है तो संघर्ष और संसाधनों का दबाव बढ़ता है। यही स्थिति आर्थिक मोर्चे पर भी देखने को मिलती है, जहाँ वैश्विक व्यापार, महँगाई और घरेलू असंतोष के बीच संतुलन बनाना उसके लिए कठिन हो गया है। 
   ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अमेरिका का वैश्विक प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है। जिस प्रकार "हर सिक्के के दो पहलू" होते हैं उसी प्रकार हर निर्णय में दो चुनौतियाँ होती है ‌। कोई भी कदम उठाने के पूर्व उससे होने वाले लाभ के साथ होने वाली हानि की गंभीरता से विचार करना चाहिए, जिससे निर्णय लेना सरल  हो जाए।
यदि कोई निर्णय अतिउत्साह में लिया जाता है तो स्पष्ट दिशा का अभाव रहता है। नीतियों में असमंजस के कारण आज अमेरिका किसी एक दिशा में सशक्त होकर आगे नहीं बढ़ पा रहा।उसके इस अविवेकी निर्णय से उसकी वैश्विक साख पर दीर्घकालिक दुष्परिणाम देखने को मिलेगें। आज धीरे-धीरे उसकी वैश्विक पकड़ कमजोर होती दिख रही है।कहीं ऐसा तो नहीं कि अमेरिका ने यह कार्य बिना विचार के ही कर लिया हो वैसे बिना विचार के काम करने पर गिरधर कविराय की प्रसिद्ध कुंडली कुछ ऐसा कहती है-
बिना विचारे जो करै, 
सो पाछे पछिताय।
काम बिगारै आपनों,
जग में होत हंसाय।।
 जो आज अमेरिका पर ठीक बैठती है। अमेरिका का यह निर्णय आज एक संक्रमण काल से गुजर रहा है, वह यदि अभी भी नहीं सम्हला तो विश्व को यह समझते देर न लगेगी कि  “साँप-छछूंदर” की कहावत में साँप कौन और छछूंदर कौन ?


डॉ नुपूर निखिल देशकर
11/4/26
- **Event URL**: https://allevents.in/jabalpur/आज-के-समय/200030097594432
- **Event Categories**: 
- **Interested Audience**: 
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## Ticket Details


## Event venue details

- **city**: Jabalpur
- **state**: MP
- **country**: India
- **location**: Niwarganj
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## Event gallery

- **Alt text**: आज के समय
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## FAQs

- **Q**: When and where is आज के समय being held?
  - **A:** आज के समय takes place on Wed, 04 Nov, 2026 at 12:00 am to Wed, 04 Nov, 2026 at 12:00 am at Niwarganj, Jabalpur, Madhya Pradesh, India.
- **Q**: Who is organizing आज के समय?
  - **A:** आज के समय is organized by नुपूर की लेखनी.

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