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The event you are looking at is a past event. Check out this upcoming event Shrimad Bhagwat Katha - 16 To 22 December 2018 - Sillod Aurangab happening on Sun Dec 16 2018 at 03:00 pm at VSSCT MaharastraSalasar Nagar Navghar road Bhayndar, Thane 501104, Thane, India

Shrimad Bhagwat Katha

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Shrimad Bhagwat Katha


? Shrimad Bhagwat Katha : ?
Pujya Shri Devi Richa Mishra
Shivpuri MadhyaPradesh | 08-December-2018

“जो पापों को काटता है, वही है तुम्हारा असली पिता।”

विश्व शान्ति, मानव कल्याण, पर्यावरण एवं भारतीय संस्कृति व संस्कारो की शिक्षा हेतु विश्व शान्ति सेवा समिति, कानपुर एवं विश्व शान्ति सेवा चैरिटेवल ट्रस्ट दिल्ली के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन मोतीझील मैदान कानपुर में दिनांक 21 नवम्बर 2016 से दोपहर 2:30 बजे से 6:30 बजे तक चल रहा है।

परम श्रृध्देय श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज के पावन सानिध्य में मोतीझील मैदान, कानपुर में शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा के अन्तर्गत सभी भक्तों को पूज्य महाराज श्री के द्वारा चतुर्थ दिवस की कथा श्रवण कराई गई।

कथा प्रसंग की शुरूआत करने से पूर्व कथा के मुख्य यजमान श्रीमती मंजू शुक्ला उनके पुत्र आनन्द शुक्ला एवं सह यजमान जय प्रकाश तिवारी, मधु तिवारी जी , एवं उत्सव यजमान श्रीमती पपिया मण्डल व श्री संजीत मण्डल ने व्यास पूजन व आरती कर महाराज श्री से आर्शीवाद प्राप्त किया।

इसके उपरांत महाराज श्री ने अपने गुरूओं को प्रणाम किया एवं विश्व शान्ति के लिए पूजा अर्चना की। कथा प्रसंग की शुरूआत बड़े ही सुन्दर -सुन्दर भजन से की। जिसके बोल है :
तेरी बिगड़ी बना देगी चरण रज राधा प्यारी की।

महाराज श्री ने कहा कि आज के व्यक्ति को प्रभु की महिमा का बोध नहीं है जहाँ पहले भगवान की भक्ति हर घर में मिलती थी वो आज के समय में मात्र 25 प्रतिशत ही रह गयी है क्योकि किसी को इतना समय ही नहीं है जो वो भगवान की पूजा कर सके।

भगवान का चरणोदक जीव के लिए कितना उपयोगी है उसे यह पता ही नहीं है कि प्रभु का चरणोदक उसका कितना कल्याण कर सकता है। प्रभु का चरणोदक तुम्हें इस संसार रूपी भव सागर से उभार सकता है तुम्हें तुम्हारे जीवन से तर सकता है। अगर तुम्हें भगवान दिख नहीं रहा है तो ये तुम्हारी कमी है न कि भगवान की क्योकि तुम्हारी सोच इतनी तुच्छ है, तुम्हारा नजरीया सीमित है जिससे तुम्हे परमात्मा नहीं दिख रहा है। केवल असीमित सोच वाला व्यक्ति जीव ही परमात्मा का दीदार कर सकता है।
श्री राम सरन दास जी के बारे में एक सच्ची घटना श्रोताओं के श्रवण कराई। जुलाई 1957 को उन्हें बहुत तेज बुखार हुआ, उनका इलाज चलता रहा और सितंबर माह में डॉक्टरों ने जवाब दे दिया और कहा की अब आपका मर्ज़ ला इलाज हो चला है। उन्हें अस्पताल से घर वापस ले आया गया। उन्होंने अपने घर के लोगों से कहा की मुझे भगवान के चरणों का चरणामृत पिलाया जाये। घर वालों ने उन्हें रोज़ चरणामृत पिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उनका स्वास्थ्य ठीक होने लगा और वो एक माह में ही बिलकुल ठीक हो गए।

जब तुम कुछ अच्छा कार्य करने की कोशिश करते हो तो समाज तुम्हें पीछे की ओर खीचता है जैसे चुम्बक लोहे को तुम्हें अपना ध्यान सकरात्मक सोच बना कर रखना है। तब तुम्हें परमात्मा की प्राप्ति होगी। स्वतंत्र बनो ये मत सोचो कि तुम भक्ति करोगे तो ये संसार तुम्हें क्या कहेगा बस ये सोचो अगर तुमने मेरे ठाकुर की भक्ति नहीं करोगे तो उन्हें कैसा लगेगा। बिना किसी सोच विचार के भगवान की भक्ति में लीन हो जाओ।

पूज्य महाराज श्री ने कथा करते हुए बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार है जिसमे भगवान विष्णु ने एक बौने के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया।

वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है। महबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था। महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी। उसके राज्य में प्रजा बहुत खुश और समृद्ध थी। उसको उसके पितामह प्रहलाद और गुरु शुक्राचार्य ने वेदों का ज्ञान दिया था। समुद्रमंथन के दौरान जब देवता अमृत ले जा रहे थे तब इंद्रदेव ने बाली को मार दिया था जिसको शुक्राचार्य ने पुनः अपन मन्त्रो से जीवित कर दिया था।

महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रस्सन करने के लिए तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा। बाली भगवान ब्रह्मा के आगे नतमस्तक होकर बोला “प्रभु, मै इस संसार को दिखाना चाहता हूँ कि असुर अच्छे भी होते हैं | मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई पराजित ना कर सके।“ भगवान ब्रह्मा ने इन शक्तियों के लिए उसे उपयुक्त मानकर बिना प्रश्न किये उसे वरदान दे दिया।

शुक्राचार्य एक अच्छे गुरु और रणनीति कार थे जिनकी मदद से बाली ने तीनो लोकों पर विजय प्राप्त कर ली। बाली ने इंद्रदेव को पराजित कर इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया। एक दिन गुरु शुक्राचार्य ने बाली से कहा अगर तुम सदैव के लिए तीनो लोकों के स्वामी रहना चाहते हो तो तुम्हारे जैसे राजा को अश्वमेध यज्ञ अवश्य करना चाहिए।
बाली अपने गुरु की आज्ञा मानते हुए यज्ञ की तैयारी में लग गया। बाली एक उदार राजा था जिसे सारी प्रजा पसंद करती थी। इंद्र को ऐसा महसूस होने लगा कि बाली अगर ऐसे ही प्रजापालक रहेगा तो शीघ्र सारे देवता भी बाली की तरफ हो जायेंगे।

इंद्रदेव देवमाता अदिति के पास सहायता के लिए गए और उन्हें सारी बात बताई। देवमाता ने बिष्णु भगवान से वरदान माँगा कि वे उनके पुत्र के रूप में धरती पर जन्म लेकर बाली का विनाश करें | जल्द ही अदिति और ऋषि कश्यप के यहाँ एक सुंदर बौने पुत्र ने जन्म लिया। पांच वर्ष का होते ही वामन का जनेऊ समारोह आयोजित कर उसे गुरुकुल भेज दिया।
इस दौरान महाबली ने 100 में से 99 अश्वमेध यज्ञ पुरे कर लिए थे। अंतिम अश्वमेध यज्ञ समाप्त होने ही वाला था कि तभी दरबार में दिव्य बालक वामन पहुँच गया।

महाबली ने कहा कि आज वो किसी भी व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है। तभी गुरु शुक्राचार्य महाबली को महल के भीतर ले गये और उसे बताया कि ये बालक ओर कोई नहीं स्वयं भगवान विष्णु हैं वो इंद्रदेव के कहने पर यहाँ आए हैं और अगर तुमने इन्हें जो भी मांगने को कहा तो तुम सब कुछ खो दोगे।

महाबली अपनी बात पर अटल रहे और कहा मुझे वैभव खोने का भय नहीं है बल्कि अपन प्रभु को खोने का है इसलिए मै उनकी इच्छा पूरी करूंगा।
महाबली उस बालक के पास गया और स्नेह से कहा “आप अपनी इच्छा बताइये।
उस बालक ने महाबली की और शांत स्वभाव से देखा और कहा “मुझे केवल तीन पग जमीन चाहिए जिसे मैं अपने पैरों से नाप सकूं।”

महाबली ने हँसते हुए कहा “केवल तीन पग जमीन चाहिए, मै तुमको दूँगा।”
जैसे ही महाबली ने अपने मुँह से ये शब्द निकाले वामन का आकार धीरे धीरे बढ़ता गया | वो बालक इतना बढ़ा हो गया कि बाली केवल उसके पैरों को देख सकता था। वामन आकार में इतना बढ़ा था कि धरती को उसने अपने एक पग में माप लिया।

दुसरे पग में उस दिव्य बालक ने पूरा आकाश नाप लिया। अब उस बालक ने महाबली को बुलाया और कहा मैंने अपने दो पगों में धरती और आकाश को नाप लिया है। अब मुझे अपना तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची, तुम बताओ मै अपना तीसरा कदम कहाँ रखूँ।

महाबली ने उस बालक से कहा “प्रभु, मैं वचन तोड़ने वालों में से नहीं हूँ आप तीसरा कदम मेरे शीश पर रखिये।

भगवान विष्णु ने भी मुस्कुराते हुए अपना तीसरा कदम महाबली के सिर पर रख दिया। वामन के तीसरे कदम की शक्ति से महाबली पाताल लोक में चला गया। अब महाबली का तीनो लोकों से वैभव समाप्त हो गया और सदैव पाताल लोक में रह गया। इंद्रदेव और अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु के इस अवतार की प्रशंशा की और अपना साम्राज्य दिलाने के लिए धन्यवाद दिया।
भारत देश के लोगों से एक विनती की कि गंगा, यमुना, नर्मदा इत्यादी नदियों को प्रदुषित होने से बचायें अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी इनके दर्शन होने दो। गंगा, यमुना, नर्मदा को अविरल बहने दो।

भगवान का प्राकट्य धर्म की रक्षा के लिए होता है धर्म की रक्षा करना सिर्फ साधु सन्तों का कार्य नहीं बल्कि जिसने हिंदू धर्म में जन्म लिया है उन सबको धर्म की रक्षा करनी चाहिए। महाराज श्री ने भक्तों से एक आग्रह किया कि आप सभी अपने-अपने बच्चों को धर्मात्मा बनाकर जायें। आप सभी को धर्म के साथ खड़ा होना चाहिए। धर्म को मजबूत करने के लिए युवा वर्ग को भी धर्म के साथ खड़ा होना पडे़गा।

‘‘नन्द के आनन्द भयो , जय कन्हैया लाल की’’

श्री कृष्ण जन्मोत्सव के तत्वाधान में सुन्दर ,मनोहर श्री कृष्ण भगवान की बाल रूप की झल्कि दिखाई गई। ‘‘नन्द के आनन्द भयो , जय कन्हैया लाल की’’ आज कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी ही धूम-धाम से मनाया गया सभी भक्तों के बीच कृष्ण जन्म कि बधाईयां बांटी गई।
कथा के मुख्य यजमान श्रीमती मंजू शुक्ला उनके पुत्र आनन्द शुक्ला एवं सह यजमान जय प्रकाश तिवारी, मधु तिवारी जी एवं उत्सव यजमान श्रीमती पपिया मण्डल व श्री संजीत मण्डल ने सपरिवार सहित कृष्ण पूजन किया। कल की कथा में प्रभु की बाल लीलाओं का वर्णन किया जायेगा। कृष्ण जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने बड़े ही सुन्दर भजन भक्तों को श्रवण कराये जिनको सुनकर सभी उपस्थित भक्त झूम उठे।

राधे राधे बोलना पड़ेगा.....।



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