

# Event Details

- **Event Name**: गीता3/19
- **Event Start and End Date**: Thu, 19 Mar, 2026 at 12:00 am
- **Event Description**: *गीता अध्याय 3/19*
   @gitasatsang 
  #drhbpandey #सत्संग
 डां.हरिवंश पाण्डेय 
********************
 पूर्व श्लोक में कहा गया कि जो आत्मज्ञानी हो गया उसके लिये किसी अनुष्ठान को करने न करने से कोई फर्क नहीं पड़ता।इस श्लोक मे अनासक्त होकर कर्म करने की बात कह रहे हैं।
*तस्मादसक्तः सततं कार्य कर्म समाचर।*

*असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पुरुषः ।।*

*तस्मात्  असक्तः सततम् कार्यम्   समाचर*
अतयेव अनासक्त भाव से निरंतर कर्तव्य कर्म करो।
*हि असक्तः कर्म आचरन्*
 क्योंकि  अनासक्त होकर  कर्मका आचरण करनेसे *पुरुषः  परम्  आप्नोति* पुरु मोक्ष को प्राप्त करता है।



*अतएव तुम अनासक्त होकर निरन्तर कर्त्तव्य कर्मका आचरण करो, क्योंकि अनासक्त होकर कर्मका आचरण करनेसे पुरुष मोक्ष प्राप्त करता है।*
 *मनन-चिंतन*
भगवान ऊपर कह चुके हैं कि आत्मसाक्षात्कार हो जाय तो कर्म करो न करो फर्क नहीं पड़ता।
  तुम कर्तब्य कर्म छोड़कर बन जा कर भिक्षाटन की बात करते हो वह तुम्हारे लिये उचित नहीं है क्योकि तुम अभी आत्मारामी नहीं हुये हो।तो एक काम करो कर्मों को अनासक्त भाव से करो।
 अनासक्त भाव का तात्पर्य ये नहीं कि 'बेमन से कैसे भी कर्म करो' सावधान रहें ये भाव नहीं है।अनासक्त का भाव फल की इच्छा न हो,बस।पर कर्म उत्तम ढंग से हो।
  पर ऐसा आदेश क्यो? तो समझिये निमित्त होकर कर्म करेंगे तब हम पाप पुण्य के बंधन से मुक्त हो जायेंगे और आवागमन का कारण ही समाप्त हो जायेगा।तो मोक्ष यानी जो परम लक्ष्य है वो मिल जायेगा।
 यह सबसे आसान साधन भगवान ने बताया।अर्जुन के माध्यम से हम सभी के लिये संदेश है।
 *इस श्लोक में श्री कृष्ण अर्जुन को सफलता और शांति का रहस्य बता रहे हैं।* 
    #यहाँ तीन मुख्य बातें समझने योग्य हैं--
जैसे ही  हम फल से चिपक जाते हैं, तो मन में डर और चिंता आ जाती है। हमें फल की चिंता किए बिना कर्म को एक 'यज्ञ' या 'सेवा' समझकर करना चाहिए।   जैसे एक विद्यार्थी का कर्तव्य पढ़ाई करना है, एक सैनिक का देश की रक्षा करना।
​हमें अपनी जिम्मेदारियों से भागना नहीं है, बल्कि उन्हें पूरी ईमानदारी और उत्साह से निभाना है।

जो व्यक्ति बिना स्वार्थ, बिना अहंकार और बिना फल की इच्छा के अपना काम करता है, उसका मन (चित्त) शुद्ध हो जाता है।
​ऐसे व्यक्ति के कर्म उसे बंधन में नहीं डालते।
​अंततः, वह व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त कर लेता है और जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
*दैनिक जीवन में इसका उपयोग*
*​तनाव मुक्ति:* आप परिणाम (Result) की चिंता करना छोड़िये  और केवल अपनी मेहनत (Process) पर ध्यान देते रहें , तो आपका तनाव (Stress) अपने आप कम हो जाता है।
*​फोकस:* फल की चिंता न करने से आपकी सारी ऊर्जा काम को बेहतर बनाने में लगती है, जिससे सफलता की संभावना और बढ़ जाती है।
*​समभाव:* सफलता मिलने पर घमंड नहीं होता और असफलता मिलने पर डिप्रेशन नहीं होता।
- **Event URL**: https://allevents.in/agra/गीता3-19/200029752582753
- **Event Categories**: 
- **Interested Audience**: 
  - total_interested_count: 43

## Ticket Details


## Event venue details

- **city**: Agra
- **state**: UP
- **country**: India
- **location**: Namner
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- **long**: 78.007086679801
- **full address**: Namner, Agra, Uttar Pradesh, India

## Event gallery

- **Alt text**: गीता3/19
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## FAQs

- **Q**: When and where is गीता3/19 being held?
  - **A:** गीता3/19 takes place on Thu, 19 Mar, 2026 at 12:00 am to Thu, 19 Mar, 2026 at 12:00 am at Namner, Agra, Uttar Pradesh, India.
- **Q**: Who is organizing गीता3/19?
  - **A:** गीता3/19 is organized by सत्संग.

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